GN1 कोराना पैंडे मिक शब्दावली और भारत में बेड की क्षमता

कोई इसे कोरोना कहता है कोई नोवेल कोरोनावायरस तो कोई कोविड-19 कह कर इठलाता है. कोई इसके टीके को वैक्सीनेशन कहता है तो कोई इम्युनाइजेशन की बात करता है . कोई कहता है यह अबतक की सबसे भयंकर बीमारी है कोई कहता है ये तो कुछ है ही नहीं .कोई कहता है भारत के अस्पताल भर गए हैं तो कोई कहता है अभी बहुत जगह बाकी है . सही - सही पता नहीं .पर जानना जरुरी है . चलिए इन सारे प्रश्नों का उत्तर हम आपको 5 मिनट में दे देते हैं .

कोरोनावायरस एक वायरस का समूह है जिसमे एक जैसे , मिलते - जुलते प्रभाव वाले वायरस शामिल हैं । वर्ष 2019 मे इसका अबतक का सबसे खतरनाक रूप चीन के वूहान मे सामने आया . मेडिकल क्षेत्र मे जब कोई नया वायरस देखा जाता है जो पहले से ज्ञात नहीं था तो उसे नॉवेल वायरस कहा जाता है . इसलिए कोरोनवायरस 19 वर्तमान समय का नॉवेल कोरोनवायरस है . कोविड( कोरोना वायरस डिजिज ) 19 उससे यानि नॉवेल कोरोनवायरस से होने वाली बीमारी है .
दूसरी बात कि कोविड 19 जो पहले चीन मे एक Epidemic थी ,अब एक pandemic बन चुकी है . कोई बीमारी जब एक देश के बहुत से लोगों को पकड़ लेती है तो उसे Epidemic और अगर बहुत से देशो में फ़ैल जाती है तो उसे Pandemic कहते है .
तीसरी बात जब बीमारी सामान्य गति से फैलती है तो उसे spread कहते है और जब अप्रत्याशित तेजी से फैलती है तो उसे Outbreak कहते हैं. इस हिसाब से Covid 19 का प्रसार outbreak की श्रेणी मे आता है .
चौथी बात जब बीमारी हो जाती है तो उसे ठीक करने के लिए हम दवा या medicine देते हैं . पर जब कोइ महामारी फ़ैली हुई है और हमें अबतक नहीं हुई है और हम चाहते हैं कि हो भी नहीं, तो हम उसका Vaccine लेते हैं . ये वैक्सीन हमारे शरीर की, उस रोग के वायरस के विरुद्ध, प्रतिरोध या Immunity को बढाता है .
पाँचवी बात vaccination और immunization मे अंतर । Vaccination एक प्रक्रिया है जिसमे हम डाक्टर के पास जाकर टीका( चेचक ) या ड्राप ( पोलियो) या इंजेक्शन ( Hepatitis B ) लेते हैं . Vaccination के बाद हमारे शरीर में जो परिवर्तन होता है जिसके फलस्वरूप उस रोग के वायरस के विरुद्ध हमारी शक्ति बढ़ती है उसे Immunization कहते है.
इन बेसिक चीजो को जब हम जान जाएँगे तब ही हम हम अखबार में या इन्टरनेट पर उपलब्ध लेखो को पूरी तरीके से समझ पाएंगे . चलिए ,शुरुआत करते हैं और इतिहास की कुछ Pandemics के बारे में चर्चा करते है .
इसके पहले भी विश्व कई Pandemic से गुजर चुका है और उबर चुका है . यह जानना होगा की एक बार फ़ैलने के बाद कोई Pandemic कितने दिन रहता है , कितने लोगो को प्रभावित करता है और आखिर जाता कैसे है .
आइये इतिहास की 2-3 मुख्य Pandemics के बारे में ये बाते जानते हैं . इसी चर्चा से हमें कोरोना का हल मिलेगा .
चेचक
अबतक के इतिहास में सबसे बड़ी महामारी चेचक या small Pox रही है जो विश्व में 3000 साल तक जारी रही और इसकी Vaccine के आविष्कार और प्रयोग के बाद 1979 में पूरी तरह समाप्त हो गयी .केवल अंत के सौ सालो में ही इस बीमारी से विश्व में 500 मिलियन यानि 50 करोड़ मौते हुईं .इस बीमारी मे शरीर पर बड़े बड़े दाने निकलते थे और बुखार होता था । पर ये दाने उन दानों की अपेक्षा छोटे होते थे जो एक अन्य पूर्ववर्ती बीमारी मे होते थे इसलिए इसे small pox कहा गया .
स्पेनिश फ्लू
इसके बाद नंबर आता है स्पेनिश फ्लू का जिससे 1918 से 1920 के बीच एक साल मे ही 17 से 50 मिलियन लोग मारे गए ।भारत की जनगणना के इतिहास मे 1911-21 एकमात्र ऐसा दशक था जिसमे पिछले दशक की तुलना मे कम आबादी रिकार्ड हुई। कारण था स्पैनिश फ्लू मे लोगों का मर जाना.उस समय प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था (1914-18)। अपने लोगों का मनोबल बनाए रखने के लिए शासकों ने मृतकों की संख्या छुपाई और लड़ाई पर केंद्रित होने के कारण बीमारों की देखभाल भए नहीं हुई । नतीजा ये हुआ की इस बीमारी के मरीज जो आइसलैशन कैम्स मे भर्ती थे दूसरे मृत लोगों के संक्रमण यानि सुपर इन्फेक्शन से ज्यादा मरे। सैनिक तंग रेलगाड़ियों और तंग युद्धपोतों मे बड़े समूहों मे चलते थे और आपसी संक्रमण से मरते थे . इस बीमारी का नाम स्पैनिश फ्लू इसलिए पड़ा की स्पेन के युद्ध मे शामिल न होने के कारण वहाँ के प्रेस ने इस बीमारी की खबरों को बिना दबाए आजादी के साथ प्रकाशित किया .ये बड़ी भयानक बीमारी थी। इसके दूसरे दौर मे इसका सबसे घटक रूप आया जिसमे फेफड़ों मे खून भर जाता था , शरीर नीला पड़ जाता था और मरीज कुछ घंटों मे ही मर जाता था . इसकी कोइ वैक्सीन नहीं निकली .इसके इलाज मे मास्क पहन कर निकालना , सार्वजनिक स्थानों पर नहीं थूकना ,आड़ ईविन फार्मूला, कवारेंटाइन , स्कूलों को अस्पताल मे बदलनां, ऐस्प्रिन को प्रायोगिक तौर पर शामिल करना आदि प्रयास हुए जो वर्तमान मे किए जा रहे कोविद 19 के प्रयासों से काफी मिलते हैं .इस महामारी का अंत अजीब तरीके से हुआ .1919 की गर्मियों मे इससे प्रभावित लोग या तो मर गए या उनके अंदर इम्यूनिटी आ गई( लोग खुद ही प्राकृतिक रूप से इसे झेलने में सक्षम हो गए) .
एड्स
इसके बाद आया एड्स जिसमे शरीर में बीमारियों से लड़ने की शक्ति क्षीण हो जाती है. यह 1981 से आरम्भ होकर अभी भी जारी है . पर इसका संक्रमण हवा में नहीं होने के कारण इससे बहुत कम लोग प्रभावित हैं .
इन महामारियो की चर्चा से ये बात साफ़ होती है कि कोविड-19 कोई ज्यादा खतरनाक बीमारी नहीं है और इससे भी बड़ी बीमारियाँ आकर चली गयी. आज हमारे पास बेहतर चिकित्सा व्यवस्था है. इसलिए यह बेकाबू नहीं हो सकतीसच तो ये है कि कुछ महीनो में ही बहुत से देशों ने इसपर काबू कर लिया है .न्यू ज़ीलैंड , तंजानिया और कुछ छोटे देशों को मिलकर 9 ऐसे देश है जिन्होंने इसपर काबू प लिया है .
भारत में इस बीमारी से लड़ने में कितनी सफलता मिली है इसकी अप टू डेट जानकारी मैं हर हफ्ते देता रहता हूँ , इसलिए यहाँ सिर्फ स्थाई तथ्यों को रख रहा हूँ .
अब हम आते हैं अस्पतालों मे बेड की कमी और बढ़ते हुए मरीजों की संख्या पर। कोरोना का आक्रमण कुछ बड़े शहरों मे केंद्रित होने के कारण वहाँ अस्पतालों मे जगह मिलनी मुश्किल हो रही है और वह के डाक्टर और नर्सों को काफी दबाव झेलना पड़ रहा है ।
पर अगर किसी विधि द्वारा इन मरीजों को देश के विभिन्न भागों मे शिफ्ट किया जाए तो देश भर मे उपलब्ध अस्पतालों का समुचित उपयोग होगा और भर का विकेन्द्रीकरण होगा ।
आइए अस्पतालों के आकडे देखें
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के लिंक https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1539877
पर दिनांक 24 JUL 2018 की एक प्रेस विज्ञप्ति है।इसमे अस्पतालों के बारे मे जानकारी है
इसका सारांश इस प्रकार है :
(क) सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के विभिन्न स्तरों में उपलब्ध कुल बिस्तरों की संख्या (प्राथमिक, समुदाय, उप जिला, जिला) = 739024
(ख) सरकारी अस्पतालों के विभिन्न स्तरों में उपलब्ध बिस्तरों की कुल संख्या
क. ग्रामीण क्षेत्रों में = 279588
ख. शहरी क्षेत्रों में =431173
(ग) आयुष अस्पतालों में उपलब्ध कुल बिस्तरों की संख्या = 55242
(घ) रक्षा मंत्रालय के अधीन अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की कुल संख्या = 34520
(ङ) रक्षा मंत्रालय के अधीन अस्पतालों में कुल उपलब्ध बिस्तरों की संख्या = 13748
(च) ईएसआईसी = 19765 के तहत अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की कुल संख्या
सरकार में बिस्तरों की कुल संख्या = क से च = 1573060
प्राइवेट अस्पतालों की कुल क्षमता भी लगभग इतनी ही होगी .
अतः जबतक एक्टिव मरीजों की संख्या 15 लाख नहीं हो जाती तबतक हम बिना प्राइवेट अस्पतालों की सहायता लिए सरकारी अस्पतालों मे ही उन्हे भर्ती कर सकते हैं ।
पर इसके लिए बड़े स्तर पर मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना होगा । यह मुश्किल है पर असमभव नहीं .
बहरहाल सरकार अभी इस कोशिश मे लगी है की मरीजों को उनके स्थान पर ही अस्पतालों मे क्षमता बढ़ाकर समायोजित किया जाए ।साथ ही प्राइवेट अस्पतालों को भी कोरोना से लड़ने के लिए प्रयुक्त सरकारी तंत्र में शामिल किया जा रहा है.
इस चर्चा को अब यही समाप्त करता हूँ
मुख्य बिन्दु एक बार फिर
1. कोविड -19 कोई बहुत बड़ी महामारी नहीं है
2. बिना वैक्सीन के आविष्कार के ही इसका घटना शुरू हो चुका है
3. विश्व के कई देश इसपर काबू पा चुके है
4. इसमे मरने की अपेक्षा बचाने की संभावना बहुत अधिक है
5. अस्पतालों की संख्या को लेकर चिंता की आवश्यकता नहीं है
फिर भी सामाजिक दूरी मास्क और हाथ धोना जारी रखें ताकि आप बिना इलाज के ही बचे रहें।

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